Monday, January 19, 2015
अब चरम पे खड़ा धर्म युद्ध
हो शंखनाद रण की पुकार ।
जब शोर करें ये दैत्य सारे
तब हृदय छले तेरी हुंकार ।
बलवान बनाता देश तुझे
पर धर्म बनाता तुझे अमर ।
कठिनाई बढ़ने वाली है
तू शांत चित्त हो कस कमर ।
इस बार युद्ध मायावी है
भरपूर हो रहा छल कपट ।
तू रहा सत्य की बाँह थाम
इस बल से शत्रु से निपट ।
शत्रु तेरे हैं तीन तरफ
हले कांग्रेसी प्रतिद्वंद ।
फिर सेना खड़ी विभीषण की
आखिर अमरीकी प्रतिबंध ।
यही क्रम है तेरे शत्रु का
इसी क्रम में इन पर वार कर ।
हों दृष्य या अदृष्य रहें
जनता संग इनका संहार कर ।
कुछ बातों का तुझे हो स्मरण
ये युद्ध नहीं तेरा निजी रण ।
ये युद्ध धर्म का, भारत का
सच पर अडिग यही तेरा प्रण ।
तूने अच्छा नेतृत्व दिया
बढ़ कर आगे मन जीत लिया ।
डूबे जाते थे जब ये दिल
नई किरण दिखा मनमीत दिया ।
जहाँ अंधकार गहरा फैला
कर दिया उजाला दीप जला ।
विचलित मूर्छित जो बैठे थे
हिंदुस्तानी उठ खड़ा चला ।
चला चला नहीं बैठेगा
मिला जोश नया उसे जीवन का ।
अब धूर्त मायावी पैठेगा
हमें होश मिला उसके मन का ।
होंगी भारत में कमीं कई
क्या कोस कोस कर बात बनी?
साकारात्मक जब सोचा तब,
मृद्ध शक्ति की साख जमी ।
ये सोच मिली है मोदी में
है जनता का यही प्रतिनिधी ।
बढ़ना है आगे भारत को तो
यही बची अब सफल विधी ।
मतदान पड़ेगा अभूतपूर्व
जनता में ऐसा रोष जगा ।
जब गिनती होगी वोटों की
रणबाँका बस मोदी होगा ।
तैयार रहो अब मोदी जी,
आता है शपथ ग्रहण का दिन ।
हो जीत तुम्हारी ऐसी कि
हमें याद रहे ये रण का दिन ।
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